8th Central Pay Commission का आधिकारिक रूप से गजट नोटिफिकेशन हुआ जारी,सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन की होगी समीक्षा
केंद्र सरकार ने आठवां केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) गठित कर दिया है। वित्त मंत्रालय (व्यय विभाग) द्वारा जारी भारत सरकार की राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) के अनुसार, यह आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों, रक्षा बलों और अन्य संबद्ध सेवाओं के वेतन, भत्तों, पेंशन और सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा।
👤 आयोग की संरचना
- अध्यक्ष: न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजन प्रकाश देसाई
- सदस्य (अंशकालिक): प्रो. पुलक घोष
- सदस्य-सचिव: श्री पंकज जैन
🎯 आयोग का उद्देश्य
आयोग का मुख्य कार्य सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में सुधार, भत्तों का तर्कसंगत निर्धारण और पेंशन प्रणाली की समीक्षा करना है। इसका उद्देश्य सेवा शर्तों को बेहतर बनाकर सरकारी कार्यसंस्कृति में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है।
👥 किन कर्मचारियों पर लागू होगा
आयोग की सिफारिशें इन पर लागू होंगी:
- केंद्र सरकार के औद्योगिक और गैर-औद्योगिक कर्मचारी
- अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी
- रक्षा बलों के कर्मी
- संघ शासित प्रदेशों के कर्मचारी
- संसद और उच्च न्यायालयों के कर्मचारी
- न्यायिक अधिकारी और अन्य संबद्ध विभागों के कर्मचारी
💰 पेंशन और NPS पर विशेष ध्यान
आयोग राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और पुरानी पेंशन योजना (OPS) दोनों के तहत आने वाले कर्मचारियों की ग्रेच्युटी (Gratuity) और पेंशन लाभों की समीक्षा करेगा।
इसके अलावा, आयोग यह भी देखेगा कि क्या मौजूदा पेंशन योजनाओं में सुधार की आवश्यकता है।
🕒 कार्यकाल और रिपोर्ट
आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट देने के लिए 18 माह (डेढ़ वर्ष) का समय दिया गया है।
आवश्यकता होने पर आयोग अंतरिम रिपोर्ट (Interim Report) भी दे सकेगा।
आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में रहेगा।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, आयोग अपनी सिफारिशें बनाते समय देश की आर्थिक स्थिति, विकास व्यय की आवश्यकता और वित्तीय अनुशासन (Fiscal Prudence) को ध्यान में रखेगा, ताकि विकास और जनकल्याण योजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें।
📅 पृष्ठभूमि
पिछला यानी 7वां वेतन आयोग वर्ष 2014 में गठित हुआ था, जिसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू की गई थीं।
अब 8वें वेतन आयोग के गठन से लाखों केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को वेतन संरचना में सुधार की नई उम्मीद जगी है।

